ढोला मारू लव स्टोरी , Dhola Maru love story , ढोला मारू की कहानी

News Bureau
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ढोला मारू की लव स्टोरी

भारत की राजस्थान उत्तर प्रदेश पंजाब और हरियाणा में कई प्रेम कथाएं बहुत मशहूर है जिसमें से एक कथा है ढोला मारू।

यह प्रेम कहानी इतनी लोकप्रिय है कि आठवीं सदी में इस प्रेम कहानी की शुरुआत होती है या यूं कहें कि यह प्रेम कथा आठवीं सदी की है लेकिन आज भी राजस्थान के एवं राजस्थान के आसपास के कई राज्यों में एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत की जाती है।

कहा जाता है कि नरवर के राजा नल का पुत्र ढोला था जिसे इतिहास में ढोला वह साल्हकुमार के नाम से जाना जाता है, नरवर के राजा नल अपने पुत्र का विवाह बाल अवस्था में कर देते हैं कहते हैं कि जब नल का विवाह हुआ तब करीब उनकी उम्र 4 साल थी। उनका विवाह बीकानेर उस समय बीकानेर को जगल प्रदेश कहा जाता था, के पुंगल नामक ठिकाने के पवार राजा पिंगल की बेटी मरमणि के साथ हुआ। एवं मरवणि की उम्र 3 वर्ष थी। इसलिए शादी के बाद मरवणि को नरवर उसके ससुराल नहीं भेजा था, लेकिन ढोला बड़े होने पर अपनी शादी मालवणी के साथ कर दी और बचपन में हुई शादी को ढोला लगभग भूल चुका था। लेकिन मारवणी जब बड़ी हुई तो मारवाड़ी के पिता राजा पिंगल ने ढोला को बहुत संदेश भेजें लेकिन वापस कोई जवाब नहीं मिला। क्योंकि राजा पिंगल द्वारा भेजा गया प्रथम संदेश ही ढोला की दूसरी पत्नी मालवणी के हाथ लग गया।, इसके बाद मालवणी सचेत हो गई और उसे पता चल गया कि ढोला की एक और पत्नी है। और उसने ठान ली की ढोला तक कोई भी पत्र या बात नहीं पहुंचनी चाहिए कि उसकी बचपन में की गई शादी वाली पत्नी उसको याद करती है।

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मालवणी ने अपने विश्वासपात्र नौकरों को जांगल के रस्ते पर भेज दिया और जो भी जांगल से व्यक्ति आता उसकी पूरी जांच की जाती और उसी के बाद उसे राज्य में प्रवेश दिया जाता था।

रानी के नौकरों द्वारा जांच में संदेशवाहक पकड़ा गया, जो भी संदेशवाहक पकड़ा जाता है उसे मालवणी के नौकर मार देते थे। मरवणि के कोई भी पत्र का जवाब नहीं मिलता और नहीं संदेशवाहक वापस आता। यह सब देखकर मरवणि ने अपने एक चतुर नौकर को संदेशवाहक के रूप में ढोला के पास भेजा, और मरवणि ने इससे पहले भेजे गए सभी संदेश पहाड़ों के बारे में चतुर नौकर को जानकारी दी।

उस चतुर संदेशवाहक ने जांच पड़ताल में और पूछताछ में मालवणी के नौकरों को मरवणि के बारे में कुछ नहीं बताया और उन्हें संदेह भी नहीं होने दिया।

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और वह जाकर ढोला से मिल गया, उसे तो संदेशवाहक ने ढोला को सारी बात बता दी और उसने मरवनी के रूप का बखान किया।

इसके बाद ढोला रात्रि के समय मरवणी से मिलने के लिए निकल जाता है, लेकिन जब यह बात ढोला की दूसरी पत्नी मालवणी को पता चलती है तो बहुत क्रोधित हो जाती है और उसने अपने नौकरों को कहा कि वह वेश बदल कर उसी रास्ते पर बैठ जाएं और कार्यक्रम के अनुसार मरवणि को मार दें।

जब ढोला मरवणि को लेकर राज्य में प्रवेश होता है तो उसे वहां पर कुछ लोग बैठे हुए दिखाई देते हैं और वह लोग के राजा की आवभगत के लिए राजा को ऊंट से नीचे उतरने के लिए कहते हैं। राजा जब ऊंट से नीचे उतरता है, तो उसे शराब पीने के लिए आग्रह किया जाता है, लेकिन तभी लोगों द्वारा आपस में इशारे किए जाने से मरवणि समझ गई कि कुछ योजना बध्द तरीके से यहां पर चल रहा है। और वह डोला को अपने नजदीक बुलाती है, और डोला को कान में कुछ कह देती है, ढोला सुनते ही फटाफट और पर चढ़ जाता है और मरवनी को लेकर भाग जाता है, ‌ मालवणी के नौकर उसके पीछे भागते हैं लेकिन वह राज्य में प्रवेश कर जाता है।

एवं इसके बाद ढोला अपनी दूसरी रानी को कठोर सजा देता है और मरवणि को अपने प्रियतम रानी बना देता है।

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