हनुमान बेनीवाल के दावे क्यों हुए फेल, सिर्फ एक सीट पर सिमट गई आरएलपी

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हनुमान बेनीवाल के दावे क्यों हुए फेल, सिर्फ एक सीट पर सिमट गई आरएलपी

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल चुनाव से पहले दावा कर रहे थे, कि राजस्थान में थर्ड फ्रंट के बिना भाजपा और कांग्रेस सरकार नहीं बन पाएगी।

लेकिन चुनाव नतीजों के बाद यह दावा बिल्कुल फेल हो गया, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के खाते में सिर्फ एक सीट आई ।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने 2018 की विधानसभा चुनाव में तीन विधानसभा सीटों पर चुनाव जीता था लेकिन 23 के चुनाव आने तक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल सिर्फ अपनी खींवसर विधानसभा सीट ही बचा सके, हनुमान बेनीवाल की विधानसभा चुनाव में भी जीत हार का अंतर ज्यादा नहीं रहा।

हनुमान बेनीवाल का जलवा कम क्यों?

विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और आजाद समाज पार्टी के गठबंधन के प्रत्याशियों के सभाओं और रैलियों में भीड़ तो उमड़ रही थी लेकिन यह भीड़ वोटो में तब्दील नहीं हो सकी।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के पांच प्रत्याशी 50 हजार से ज्यादा वोट प्राप्त करने में सफल रहे एवं 40 हजार से ज्यादा वोट प्राप्त करने में कुल 7 प्रत्याशी सफल रहे।

आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल स्वयं नागौर से सांसद है एवं हनुमान बेनीवाल अपनी परंपरागत खींवसर विधानसभा सीट को बचाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी एवं 2000 वोट के अंतर से चुनाव जीते।

कांग्रेस भाजपा के अलावा अन्य पार्टियों की परिणामों की बात की जाए कल 15 विधानसभा सीटों पर भाजपा एवं कांग्रेस के अलावा दूसरे प्रत्याशी जीते, जिनमें बीएसपी, बीएपी, आरएलपी व आरएलडी सहित निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं।

वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव में 27 विधानसभा सीटों पर गैर भाजपा कांग्रेसी प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत दर्ज की थी।

आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल भले ही 5 साल तक जनता के बीच नजर आते रहे लेकिन हनुमान बेनीवाल को लेकर राजनीतिज्ञ बताते हैं कि उनके भाषा पर संयमित ना रहने की वजह से काफी नुकसान हुआ है एवं इसके अलावा हनुमान बेनीवाल ने अपने प्रत्याशी को फाइनल करते समय जातीय समीकरण व नए प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में उतारने की वजह से आरएलपी पार्टी ज्यादा सीटें जीतने में नाकामयाब रही।

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News Reporter Team
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