भाम्भु गोत्र का इतिहास , Bhambhu Jati ka itihaas

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भाम्भु गोत्र का इतिहास , Bhambhu Jati ka itihaas 

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आज के आर्टिकल में हम भाम्भु जाति के इतिहास के बारे में विस्तार से चर्चा करने के साथ ही भाम्भु गोत्र का इतिहास जानने की कोशिश करेंगे

राजस्थान में ही नहीं बल्कि देशभर में जाट देवता के तौर पर पूजे जाने वाले वीर तेजाजी के भाई गुणराज की पत्नी भाम्भु गोत्र की थी , जिसका नाम रीता था।

बताया जाता है कि इस जाति के नाम के पीछे एक बड़े राजा के नाम पर गोत्र का नाम पड़ा , वर्तमान पाकिस्तान की सिंध प्रांत में दसवीं ईस्वी में भामू राजा के नाम से एक व्यक्ति ने राज किया था एवं इसी व्यक्ति के नाम पर भाम्भु गोत्र की शुरुआत हो गई।

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इस जाति का वर्तमान में निवास स्थान की बात की जाए तो राजस्थान के अजमेर , जयपुर , सीकर , चूरू , जोधपुर , नागौर , बाड़मेर , बीकानेर , हनुमानगढ़ , झुंझुनू , अलवर , टोंक जिले में भांभू जाति के लोग निवास करते हैं ।

इसके अलावा राजस्थान की पड़ोसी राज्य हरियाणा के हिसार , सिरसा , करनाल जिलों में एवं मध्य प्रदेश के रतलाम , देवास , धार , इंदौर इत्यादि जिलों में यह चाहती निवास करती है एवं इसके अलावा उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र में भी इस जाति के लोग बसते हैं एवं जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में भी भाम्भु जाति के करीब 130 गांव में लोग बसे हैं।

राजनीति व अन्य क्षेत्रों में प्रसिद्ध व्यक्तियों की बात की जाए तो इस गोत्र के  ईश्वर सिंह भामू , हिमताराम ,  जगदीश भाम्भु, जगदीप भाम्भु , सांवरमल भाम्भु , अरविंद भाम्भु,  देवाराम ,  मनीराम सहित कई व्यक्ति प्रसिद्धि पाने वाले व्यक्ति हैं।

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