जलवायु परिवर्तन से दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

जलवायु परिवर्तन से दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? किसी क्षेत्र विशेष या फिर दुनिया भर में औसत तापमान या......

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जलवायु परिवर्तन से दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

किसी क्षेत्र विशेष या फिर दुनिया भर में औसत तापमान या मौसम में अचानक से बदलाव होने को जलवायु परिवर्तन कहते हैं।

लेकिन दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं, आज हम बात करेंगे की जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा, आम जनता वायु परिवर्तन से कितना प्रभावित होगी ?

जलवायु में परिवर्तन आने के कारण मानसूनी क्षेत्र में वर्ष में वृद्धि होगी एवं इसके कारण लगातार बाढ़ जैसे हालात बने रहेंगे, लेकिन अगर कभी जल की कमी आती है तो लोगों को पानी पीने के पानी भी नसीब नहीं होगा।

जलवायु में परिवर्तन आने की वजह से समुद्री जलस्तर में इजाफा होगा, जलवायु परिवर्तन के कारण 21वीं शताब्दी के अंत तक समुद्री जल स्तर 50 सेंटीमीटर तक बढ़ाने की संभावना है, भारत में अगर ऐसी फार्मूले को देखा जाए तो 10 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को विस्थापित करना होगा एवं उड़ीसा, केरल, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, तमिलनाडु सहित कई राज्यों के लाखों गांवों एवं शहर जल मग्न हो जाएंगे एवं भारत में अगर जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश का प्रभाव देखा जाए तो देश के पूर्वोत्तर एवं दक्षिणी पश्चिमी राज्यों में बारिश ज्यादा होगी, वहीं उत्तरी भारत में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

जलवायु की परिवर्तन से मानव के स्वास्थ्य पर न सिर्फ रोगों की बढ़ोतरी होगी बल्कि रोगों की कई नई प्रजातियां भी उत्पन्न होगी, स्वास्थ्य संबंधित और भी नई समस्या उत्पन्न होती रहेगी।

जलवायु में परिवर्तन की वजह से कृषि पर भी प्रभाव पड़ेगा, पूर्वी अफ्रीका एवं भारत सहित कई देशों में गर्मी एवं नमी के कारण फसलों की उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी वहीं अमेरिका में फसल की उत्पादकता में कमी आएगी।

भारत की बात की जाए तो भारत में भी बाजरा, ज्वार, मक्का जैसी फसलों में बढ़ोतरी होगी वहीं गेहूं, धान, जो की उत्पादकता में कमी आएगी।

भारत के प्रयास

अब तक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में हमने बेहतर रूप से समझने की कोशिश की है अब हम बात आते हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत सरकार एवं में विभिन्न एजेंसीज क्या प्रयास कर रही हैं?

इसको लेकर राष्ट्रीय जल मिशन की शुरुआत की गई है, एवं राष्ट्रीय सौर मिशन की भी शुरुआत की गई है।

हिमालय की पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन करते रहने के लिए सुस्थिर हिमालयी पारिस्कीथितिकी तंत्र हेतु राष्ट्रीय मिशन स्थापित किया गया ।

कृषि को लेकर हरित भारत हेतु राष्ट्र मिशन की शुरुआत की गई।

भारत ने जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने के लिए सोलर ऊर्जा पर विशेष बल दिया है एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक भारत में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को काफी कम करने के प्रयास हेतु विजन बनाया है।

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